टनकपुर/चम्पावत। तो क्या टनकपुर में 8 वर्ष पूर्व निर्मित ट्रॉमा सेंटर (आपातकालीन चिकित्सा सुविधा केंद्र) में मरीजों को उपचार मिल सकेगा? क्षेत्र के लोगों में उक्त सवाल रह-रह कर पूछा जाता रहा है। पूर्व सरकार में उक्त ट्रामा सैन्टर भवन लगभग बनकर तैयार हो गया था। लेकिन यहां आज तक उपचार की कोई सुविधा शुरू नहीं हो सकी है वह भी तब जब टनकपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया जा रहा है।
इधर एक बार फिर उक्त ट्रामा सेन्टर को शुरू करने को लेकर स्वास्थ्य महकमा हरकत में आता दिखाई दे रहा है। गत दिवस 31 मई को AIIMS- एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) ऋषिकेश की अधिशासी निदेशक एवं मुख्य अधिशासी अधिकारी प्रोफेसर डॉ.मीनू सिंह ने यहां टनकपुर के ट्रॉमा सेंटर भवन का स्थलीय निरीक्षण कर इसके जल्द से जल्द संचालन की संभावनाओं को टटोला।
मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. घनश्याम तिवारी ने बताया कि मुआयने और आकलन के अधार पर एम्स की टीम रिपोर्ट शासन को भेजेगी। जिसके बाद इसके संचालन पर फैसला होगा।
एम्स निदेशक के नेतृत्व में यहां पहुंची टीम ने भवन क्षेत्र का अवलोकन कर इमरजेंसी एयर एंबुलेंस के लिए हेलीपैड सुविधा के अलावा उप जिला अस्पताल के आईसीयू,ब्लड स्टोरेज यूनिट,ऑक्सीजन प्लांट आदि का भी निरीक्षण कर जरूरी जानकारी जुटाई। इस दौरान उप जिला अस्पताल टनकपुर को ट्रॉमा सेंटर,जिनके बीच बमुश्किल 150 मीटर का फासला है को आपस में लिंक करने के विकल्प पर भी विचार किया गया। मुआयने के दौरान उप जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. घनश्याम तिवारी,डॉ.मोहम्म्द उमर आदि सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
जानकारी के मुताबिक प्रदेश सरकार टनकपुर में करीब 8 वर्ष पूर्व निर्मित ट्रॉमा सेंटर को शीघ्र संचालित कर क्षेत्र की इमरजेंसी हेल्थ सिस्टम को गुणवत्तायुक्त बनाने की तैयारी में हैं जिसके तहत यहां यह सर्वे किया गया है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर इसके संचालन को लेकर सरकार अगला निर्णय लेगी। गौरतलब है कि इससे पूर्व अक्टूबर 2023 में भी एम्स की एक टीम ने एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मधुर उनियाल के नेतृत्व में टनकपुर में बने इस ट्रॉमा सेंटर भवन का निरीक्षण किया जा चुका है परन्तु तीन साल बीतने पर भी हालात जस के तस ही हैं।
संचालन के लिए ये शर्ते पूरा करना है जरूरी:
1.टॉमा सेंटर में उपयोग में आने वाले उपकरण।
2.सर्जन, निश्चेतक, न्योरो सर्जन सहित डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ ।
3.भवन की खामियों को दूर करना होगा।
टनकपुर ट्रॉमा सेंटर भवन में है पीएसी कर्मियों का आवासः
टनकपुर। टनकपुर क्षेत्र में आकस्मिक सेवाओं को बेहतर करने के लिए वर्ष 2017 में 1.01 करोड़ रुपये की लागत से ट्रॉमा सेंटर बनकर तैयार हुआ थे। लेकिन ये आजतक शुरू नहीं हो सका। कमोबेश कुछ इसी तरह के हाल लोहाघाट में निर्मित ट्रॉमा सेंटर भवन के भी हैं जिसका उपयोग ओपीडी मरीजों को देखने और कार्यालय के काम के लिए किया जा रहा है। टनकपुर ट्रॉमा सेंटर भवन फिलहाल पीएसी कर्मियों के आवास,पूर्णागिरि मेला अवधि में ड्यूटी पर यहां पहुंचे बम निरोधक दस्ता और कई स्वास्थ्य कर्मियों के अस्थाई रूप से रहने के काम आ रहा है। जो स्वास्थ्य महकमे के उच्चाधिकारियों सहित स्थानीय जन प्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
अपने हाल पर आंसू बहाता टनकपुर में निर्मित ट्रामा सेन्टर भवन।
