टनकपुर/चंपावत। देश में चल रहे तेल संकट के चलते डीजल-पेट्रोल की किफायत पर प्रशासनिक स्तर पर भी कवायद शुरू की जा रही है। चंपावत जिले में अब हर शनिवार को नो व्हीकल डे घोषित किया गया है। जिसके अंतर्गत कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और साइकिल के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा भी ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
पांच राज्यों में चुनाव सम्पन्न हो जाने के बाद एकाएक अंतर्राष्ट्रीय हालात का हवाला दे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 मई को ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई उपाय बताते हुए लोगों से इस अपील पर काम करने का आग्रह किया था। उसके बाद कई राज्य सरकारों ने इसे लेकर पहल शुरू कर दी थी। और अब चंपावत जिला प्रशासन ने भी कदम उठाए हैं। आज 18 मई को डीएम मनीष कुमार ने इसे लेकर बाकायदा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की नागरिकों से अपील की है। साथ ही लोगों से एक वर्ष तक नए सोने की खरीद सीमित रखने और सामाजिक एवं धार्मिक नेताओं के सहयोग से पुराने आभूषणों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया।
.जिलाधिकारी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं बल्कि सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। डीएम द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब सरकारी विभागों में बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली को प्राथमिकता दी जाएगी तथा अत्यंत आवश्यक होने पर ही अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा निजी क्षेत्र में भी ‘वर्क फ्रॉम होम’ संस्कृति को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया है। ऊर्जा बचत के उद्देश्य से सरकारी काफिलों में वाहनों की संख्या को तत्काल प्रभाव से 50 प्रतिशत तक सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त सरकारी एवं निजी भवनों, मॉल, होटल तथा रेस्तरां में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने अथवा एसी के अनावश्यक उपयोग को हतोत्साहित करने को कहा गया है। जिलाधिकारी ने अनावश्यक सजावटी प्रकाश व्यवस्था पर नियंत्रण रखने के निर्देश भी दिए हैं। इसके अलावा जनपद में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने हेतु ईवी चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। डीएम ने कहा कि प्रत्येक शनिवार को विशेष ‘नो व्हीकल डे’ अभियान चलाया जाएगा, जिसके अंतर्गत कारपूलिंग, सार्वजनिक परिवहन तथा साइकिल के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। बताया कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए “मेड इन उत्तराखण्ड” अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प एवं जीआई टैग उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए एमएसएमई इकाइयों एवं स्वयं सहायता समूहों को प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, ताकि स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध हो सके।
पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहन देने हेतु धार्मिक,ग्रामीण, वेलनेस एवं इको-टूरिज्म सर्किटों का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। वहीं सरकारी स्तर पर गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं पर अस्थायी रोक लगाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य एवं बचत को ध्यान में रखते हुए आशा कार्यकर्ताओं एवं महिला समूहों के माध्यम से कम तेल वाले भोजन के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही विद्यालयों एवं सरकारी कैंटीनों में तेल के उपयोग की समीक्षा भी की जाएगी। वहीं कृषि क्षेत्र में प्राकृतिक खेती एवं जीरो बजट फार्मिंग को बढ़ावा देकर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। एग्रीस्टैक एवं फार्मर आईडी के माध्यम से उर्वरक प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। जिलाधिकारी ने बताया कि ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के अंतर्गत रूफटॉप सोलर परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा तथा नेट मीटरिंग अनुमोदनों की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। साथ ही पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार को मिशन मोड में संचालित करने तथा माइनिंग, सोलर एवं पावर प्रोजेक्ट्स को सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से त्वरित स्वीकृति प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी।
जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की है कि वे ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। उन्होंने नागरिकों से कम से कम एक वर्ष तक नई सोने की खरीद सीमित रखने तथा सामाजिक एवं धार्मिक नेताओं के सहयोग से पुराने आभूषणों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया। डीएम ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन दिशा-निर्देशों का स्वयं कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें तथा अधीनस्थ कार्मिकों के माध्यम से भी इसे प्रभावी रूप से लागू कराया जाए।
जिलाधिकारी चम्पावत मनीष कुमार।