टनकपुर/चंपावत। डॉ. लता खर्कवाल ने सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा से जंतु विज्ञान विषय में पीएचडी के लिए शोध कार्य किया है। डॉ. धर्मेंद्र कुमार राठौर के निर्देशन में यह शोध पूरा करने के साथ ही उन्हें उक्त डिग्री प्रदान की गई है।
डा. लता द्वारा लोहाघाट स्थित 'लोहावती नदी एवं उसके आसपास के पारंपरिक जल स्रोतों की पेयता का भौतिक-रासायनिक मानकों के आधार पर तुलनात्मक अध्ययन' विषय पर हुए शोध में कुल 26 जल गुणवत्ता मानकों-जिनमें भौतिक, रासायनिक, भारी धातु एवं सूक्ष्मजीव संबंधी पहलू शामिल हैं-का विश्लेषण किया गया था। इसके माध्यम से अध्ययन क्षेत्र के विभिन्न जल स्रोतों की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन संभव हो सका। साथ ही पेयजल की गुणवत्ता का समग्र आकलन प्रस्तुत किया गया। यह अध्ययन विशेष रूप से जल संकट से प्रभावित पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान सिद्ध कर सकता है। डॉ. लता खर्कवाल ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने शोध-निर्देशक डॉ. धर्मेंद्र कुमार राठौर और अपनी शिक्षिका मां अनीता खर्कवाल एवं राईका सिप्टी में प्रधानाचार्य के पद पर तैनात अपने पिता राधेश्याम खर्कवाल एवं परिजनों को दिया है।
डाक्टरेट की उपाधि मिलने के बाद डा.लता खर्कवाल।