टनकपुर/चंपावत/पाटी। जनपद चम्पावत में विकासखंड पाटी की ग्राम पंचायत गागर के साला रज्यूड़ा तोक के ग्रामीणों को सड़क सुविधा न होने का दंश अक्सर झेलना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री की विधानसभा का जिला होने के बावजूद ग्रामीण मरीजों व घायलों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाने के लिए 6 किमी दूर मुख्य सड़क गागर तक पहुंचा रहे हैं। आज 9 अगस्त को भी ग्रामीणों ने बैल के हमले से घायल व्यक्ति की डोली के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाया। बमुश्किल उक्त विषम और खड़ी चढ़ाई पार कर मरीज को सड़क तक पहुंचने में 4 घंटे का समय लग गया।
साला रज्यूडा तोक निवासी कैलाश भट्ट पुत्र पूर्णानंद भट्ट रविवार सुबह 6:30 बजे अपने गाय-बैलों को पास के खेतों में चारा चुगाने ले जा रहे थे। इसी दौरान एक बैल ने उन पर हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। सींग लगने से उनके पांव और आसपास गंभीर चोट आई और काफी रक्तस्राव होने लगा। गंभीर हालत देख ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की। सड़क नहीं होने से ग्रामीणों ने कुर्सी की डोली बनाकर घायल कैलाश भट्ट को बैठाया और मुख्य सड़क गागर तक पैदल ले गए।
सुबह करीब 7 बजे ग्रामीण डोली लेकर रवाना हुए, खड़ी चढ़ाई और गर्मी के बीच घायल को कंधों पर ढोना ग्रामीणों के लिए बेहद मुश्किल रहा। करीब 4 घंटे के कठिन सफर और रास्ते में 4 बार विश्राम करने के बाद ग्रामीण सुबह करीब 11 बजे मुख्य सड़क गागर तक पहुंच पाए। इसके बाद निजी वाहन से घायल को हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल रवाना किया गया।
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खड़ी चढ़ाई में शासन-प्रशासन को कोसते रहे ग्रामीणः
टनकपुर/चम्पावत। घायल को डोली में लेकर खड़ी चढ़ाई चढ़ते समय ग्रामीण पसीना पोछते हुए शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति अपना आक्रोश जताते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में नेता सड़क निर्माण का आश्वासन देकर वोट मांगते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद गांव की ओर मुड़कर नहीं देखते। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क के अभाव में बीमार और घायल लोगों को इसी तरह डोली के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना उनकी मजबूरी बन गई है। ग्रामीण शंकर भट्ट, मोहन जोशी, नवीन जोशी, पीतांबर भट्ट, ललित,जीवन भट्ट,पुष्कर जोशी,लछमन उपाध्याय, टीकाराम उपाध्याय,खष्टी दत्त,भवानी दत्त,आनंद बल्लभ, घनश्याम आदि ने बताया कि रज्यूड़ा तोक में सड़क पहुंचाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन न तो प्रशासन और न ही सरकार इस ओर ध्यान दे रही है।
घायल को डोली से ले जाते ग्रामीण।
