टनकपुर/चम्पावत। देश की आजादी के आंदोलन में सात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देने वाले सूखीढांग क्षेत्र की उपेक्षा आजादी के 80 वषों बाद भी जारी है। टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच (राष्ट्रीय राजमार्ग) पर टनकपुर से 21 किलोमीटर दूर स्थित बृजनगर सूखीढांग में वर्ष 2012 में तत्कालीन विधायक हेमेश खर्कवाल द्वारा वर्ष 2012 में विधायक निधि से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रवेश द्वार का निर्माण कराया गया था। जो शासन प्रशासन की उपेक्षा के चलते बदहाल हो गया है।
इधर सेनानियों के परिजनों का कहना है कि एक ओर जहां विकास के नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं,वहीं किसी की नजर इस प्रवेश द्वार पर आज तक नहीं पड़ रही है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी कल्याण परिषद के जिलाध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी के मुताबिक सेनानियों के मूल गांव चौड़ाकोट धूरा में वर्षों पूर्व लाखों रुपये की लागत से सात स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में स्मारक बनाया गया था। बताया कि करीब तीन वर्ष पूर्व शासन-प्रशासन द्वारा नये स्मारक निर्माण की बात कह वहाँ से मूर्तियों को हटाकर पुराने स्मारक के निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया था परन्तु आज तक वहां पर नया स्मारक नहीं बन सका है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को क्षेत्र के विकास के साथ सेनानियों की स्मृति को भी संजोकर रखना चाहिए।
सूखीढांग क्षेत्र में खस्ताहाल में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की याद में बना प्रवेश द्वार।
