टनकपुर/देवीधुरा/चम्पावत। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज अषाडी़ कौतिकी(रक्षाबंधन) पर्व पर देवीधुरा के खोलीखांड दुबाचौड़ा मैदान में फल-फूलों से बगवाल खेली गई। उक्त रोमांचित कर देने वाली बग्वाल देखने हेतु बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी,केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा सहित ढेरों हस्तियों मौजूद रहीं। इस दौरान 50 हजार से अधिक लोगों की मौजूदगी में चारों खाम और सात थोक के योद्धाओं द्वारा 8 मिनट तक रोमांचित करने वालीबगवाल खेली गई। बगवाल मुख्य रूप से नाशपाति, सेब और अन्य फल फूलों से हुई, लेकिन अंतिम क्षणों में कुछ जोशीले योद्धाओं ने पत्थरों की भी बारिश की जिसमें कुछ लोगों के चोटिल होने के समाचार भी मिले हैं।
आज शुक्रवार को अपरान्ह 1:48 बजे शंख ध्वनि के साथ बगवाल का श्रीगणेश हुआ। जो इस बार भी पिछली बार की तरह 8 मिनट तक खेली गई। बगवाल के दौरान मौसम खुशगवार रहा। हैरतंगेज नजारा पेश करने वाली बगवाल में बगवाली वीरों सहित कुल 141 लोग चोटिल हुए। मैदान में प्रवेश करने से पूर्व सभी चारों खामों और सात थोक (गहड़वाल, चम्याल, लमगड़िया, वालिग, गोरना, कटना और फुलाराकोट) के योद्धाओं ने मां वज्र वाराही का जयकारा किया। सफेद साफा पहने वालिग खाम के बगवाली वीरों ने मुखिया बद्री सिंह बिष्ट के नेतृत्व में रणक्षेत्र में दस्तक दी। जबकि गुलाबी साफा धारण कर गंगा सिंह चम्याल के नेतृत्व में चम्याल खाम,त्रिलोक सिंह बिष्ट के नेतृत्व में केसरिया साफा पहन गहड़वाल खाम और वीरेंद्र सिंह लमगड़िया के नेतृत्व में पीला साफा पहन लमगड़िया खाम के योद्धाओं ने प्रवेश किया।
मां के जयकारे के साथ योद्धाओं ने व्रज बाराही के मंदिर की परिक्रमा करने के बाद चारों खामों के योद्धा अपने-अपने मोर्चे में डट गए। संकेत मिलते ही वालिग और लमगड़िया खाम ने फल-फूला बरसा कर बगवाल का श्रीगणेश किया। जबकि दूसरी तरफ से चम्याल और गहड़वाल खाम मोर्चा ले रहा था। नाशपाती,सेब और फूलों से बगवाल हुई,लेकिन आखिरी मिनटों में फल खत्म होने से पत्थर भी बरसे।
मंदिर के पीत वस्त्रधारी पुजारी महादेव ने अपरान्ह करीब 2 बजे चंवर झूलाकर बगवाल समाप्त होने का संकेत किया। बगवाल पर विराम लगने के बाद चारों खामों के योद्धाओं ने गले मिल कुशलक्षेम पूछी। सकुशल वापसी के लिए सभी वीरों ने देवी मां के सम्मुख शीश नवाया। घायल बगवाली वीरों का डॉक्टरों की टीम ने स्वास्थ्य शिविर में इलाज किया। बगवाल में 500 से अधिक योद्धाओं ने हिस्सा लिया। बगवाल देखने को मैदान ही नहीं, दर्शक दीर्घा और आसपास के मकानों की छतें भी खचाखच भरी थी। पंडित कीर्ति बल्लभ शास्त्री और डॉ. भुवन चंद्र जोशी ने बगवाल का आंखों देखा हाल सुनाया। बगवाल शुरू होने से पूर्व योद्धाओं ने मंदिर की परिक्रमा की और मां बाराही देवी की पूजा अर्चना भी हुई। पूजा में चारों खामों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
इस मौके पर प्रमुख रूप से वाराही मंदिर समिति के अध्यक्ष हीरा बल्लभ जोशी,जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी,पूर्व विधायक पूरन सिंह फर्त्याल,चंपावत की ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा,दर्जा मंत्री हुकम सिंह कुंवर, श्याम नारायण पांडेय,सुभाष बगौली,हेमा जोशी,भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह सामंत,जिला महामंत्री मुकेश कलखुड़िया,प्रदेश मंत्री निर्मल माहरा,सतीश चंद्र पांडेय, लक्ष्मण सिंह लमगड़िया आदि मौजूद रहे।
देवीधुरा में खेली गई बग्वाल का नजारा।
